Waqf Bill 2025

वक्फ संशोधन विधेयक 2025


वक्फ क्या है?

वक्फ एक इस्लामी परंपरा है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को स्थायी रूप से धार्मिक, परोपकारी या सामाजिक उद्देश्यों के लिए दान कर देता है। यह संपत्ति आमतौर पर मस्जिदों, कब्रिस्तानों, मदरसों, अनाथालयों आदि के रखरखाव के लिए उपयोग की जाती है। एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ के रूप में घोषित हो जाती है, तो उसे बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। भारत में वक्फ बोर्ड इस तरह की संपत्तियों का प्रबंधन करता है। वर्तमान में भारत में 8.7 लाख से अधिक पंजीकृत वक्फ संपत्तियां हैं, जो लगभग 9.4 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई हैं।


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वक्फ संशोधन विधेयक 2025 क्या है?

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025, 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन करने के लिए लाया गया एक नया कानून है। इसे 2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा पेश किया गया और 12 घंटे की बहस के बाद 288 मतों के पक्ष में और 232 मतों के खिलाफ पारित किया गया। इस विधेयक का नाम अब "यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (UMEED) एक्ट" रखा गया है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और तकनीकी सुधार लाना है।


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मुख्य प्रावधान:

1. गैर-मुस्लिमों की भागीदारी: केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।

2. सर्वेक्षण की जिम्मेदारी: वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण अब वक्फ बोर्ड की जगह जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नामित अधिकारी करेंगे।

3. पंजीकरण अनिवार्य: सभी वक्फ संपत्तियों को केंद्रीय पोर्टल पर 6 महीने के भीतर पंजीकृत करना होगा।

4. वक्फ बाय यूजर का बदलाव: पहले लंबे समय तक उपयोग के आधार पर संपत्ति को वक्फ माना जा सकता था, लेकिन अब यह नियम भविष्य में लागू होगा और पुरानी संपत्तियों पर विवाद की स्थिति में ही लागू होगा।

5. महिलाओं का प्रतिनिधित्व: वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं को शामिल करने का प्रावधान।

6. सरकारी संपत्ति पर दावा खत्म: अगर कोई सरकारी संपत्ति वक्फ के रूप में घोषित की गई है, तो वह अब वक्फ नहीं मानी जाएगी।


सरकार इसे क्यों पास कराना चाहती है?

बीजेपी और केंद्र सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन, अतिक्रमण और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जरूरी है। उनका तर्क है कि:

पारदर्शिता और जवाबदेही: वक्फ बोर्ड में अनियमितताओं को खत्म करने और डिजिटल प्रणाली से प्रबंधन को पारदर्शी बनाना।

सुधार की मांग: मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों और 2006 के सच्चर समिति की सिफारिशों के आधार पर सुधार की जरूरत।

किसानों और गरीबों के हित: बीजेपी का दावा है कि वक्फ बोर्ड द्वारा जमीन हड़पने की शिकायतें (जैसे कर्नाटक में) इस विधेयक से हल होंगी।

राष्ट्रीय हित: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता, बल्कि प्रबंधन को बेहतर करता है।


मुस्लिम और अन्य पार्टियां विरोध क्यों कर रही हैं?

मुस्लिम संगठन और विपक्षी दल (जैसे कांग्रेस, AIMIM, TMC, DMK आदि) इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनके मुख्य तर्क:

संवैधानिक उल्लंघन: यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 25 (धार्मिक स्वतंत्रता), 26 (धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अधिकार) और 30 (अल्पसंख्यक अधिकार) का उल्लंघन करता है।

मुस्लिम अधिकारों पर हमला: AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे "वक्फ बर्बाद बिल" कहा और दावा किया कि यह मुस्लिम संपत्तियों और धार्मिक स्वायत्तता को कमजोर करता है।

गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति: वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप माना जा रहा है।

केंद्र का दखल: विपक्ष का कहना है कि यह राज्य के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप है, क्योंकि संपत्ति राज्य का विषय है।

इस्लामोफोबिया का आरोप: कुछ संगठनों (जैसे AIMPLB) का मानना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाता है।


इसके फायदे (Pros):

1. पारदर्शिता: डिजिटल पंजीकरण और कलेक्टर द्वारा सर्वेक्षण से संपत्तियों का सही रिकॉर्ड होगा।

2. महिलाओं का सशक्तिकरण: मुस्लिम महिलाओं को वक्फ प्रशासन में हिस्सेदारी मिलेगी।

3. भ्रष्टाचार पर रोक: वक्फ बोर्ड के मनमाने अधिकारों को सीमित कर भ्रष्टाचार कम होगा।

4. विवादों का समाधान: सरकारी संपत्तियों पर वक्फ के दावे खत्म होने से विवाद कम होंगे।

5. आधुनिकीकरण: तकनीक के इस्तेमाल से प्रबंधन बेहतर होगा।


इसके नुकसान (Cons):

1. धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरा: गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति और केंद्र का नियंत्रण धार्मिक स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है।

2. विवाद बढ़ने की आशंका: पुरानी वक्फ संपत्तियों पर नए नियमों से कानूनी झगड़े बढ़ सकते हैं।

3. अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन: मुस्लिम समुदाय इसे अपने अधिकारों पर हमला मानता है।

4. केंद्र-राज्य टकराव: संपत्ति राज्य का विषय होने के बावजूद केंद्र का हस्तक्षेप संघवाद के खिलाफ माना जा रहा है।

5. सांप्रदायिक तनाव: इस विधेयक से धार्मिक आधार पर समाज में तनाव बढ़ सकता है।


लोकसभा में वोटिंग: पक्ष और विपक्ष में कौन?

पक्ष में (288 वोट):

एनडीए गठबंधन: बीजेपी (240 सांसद), जेडी(यू) (12), टीडीपी (16), शिवसेना (7), एलजेपी (राम विलास) (5) और अन्य सहयोगी दलों ने समर्थन किया।बी

जेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर उपस्थिति और समर्थन सुनिश्चित किया।

विरोध में (232 वोट):

इंडिया गठबंधन: कांग्रेस (99), सपा (37), टीएमसी (29), डीएमके (22), AIMIM (1), और अन्य विपक्षी दलों ने विरोध किया।

कांग्रेस, AIMIM और डीएमके ने इसे असंवैधानिक करार दिया।


निष्कर्ष

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 एक विवादास्पद कानून है जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को आधुनिक बनाने का दावा करता है, लेकिन इसे लेकर गहरे मतभेद हैं। बीजेपी इसे सुधार के रूप में देखती है, जबकि विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसे धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों पर हमला मानते हैं। यह विधेयक अब राज्यसभा में जाएगा, जहां भी तीखी बहस की उम्मीद है।


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